मुनीर बने ‘सुपर सीडीएफ’, मुल्क में ‘कमान की जंग’ शुरू, कोई हमको बना देता

अजमल शाह
अजमल शाह

पाकिस्तान में सत्ता की असली चाबी अब हाथों में है फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के। 27वें संशोधन बिल के पास होते ही उन्हें CDF (Chief of Defence Forces) का दर्जा मिलने वाला है — मतलब अब पाकिस्तान की तीनों सेनाएँ (आर्मी, नेवी, एयरफोर्स) सीधे मुनीर के कंट्रोल में होंगी।

यानी अब “पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बोले, लेकिन सुनेगा कौन?” वाला दौर फिर लौट आया है।

CDF बनते ही आसिम मुनीर = पाकिस्तान के ‘सुपर कमांडर’

इस नए पद के साथ आसिम मुनीर बन जाएंगे पाकिस्तान के सबसे शक्तिशाली सैन्य अधिकारी।
सीडीएफ बनने के बाद — प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की भूमिका सिर्फ औपचारिक रह जाएगी। सेना से जुड़ा हर बड़ा फैसला मुनीर के हाथ में होगा। यहां तक कि परमाणु बम से जुड़ा बटन भी उन्हीं के पास रहेगा।

यानी अब अगर कोई पूछे “न्यूक्लियर कोड किसके पास है?”, तो जवाब होगा — “जनरल आसिम मुनीर के पास Wi-Fi और पावर दोनों!”

30% Salary Hike + लाइफटाइम सिक्योरिटी = डील ऑफ द डे

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीडीएफ का पद मिलने के बाद आसिम मुनीर की सैलरी में 30% तक का इजाफा होगा।
इसके साथ मिलेंगे —

  • लाइफटाइम सिक्योरिटी
  • स्थायी आवास
  • विदेश नीति में सलाहकार की भूमिका
  • और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट

पाकिस्तान में अब शायद पहली बार “सैनिक कल्याण” का मतलब सिर्फ एक सैनिक से है — जनरल साहब खुद!

प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति अब ‘साइलेंट मोड’ में

सीडीएफ के बनने के बाद पाकिस्तान के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों की सैन्य मामलों में भूमिका सीमित हो जाएगी। यानि अब इस्लामाबाद की हर फाइल पर लिखा होगा — “For approval: General Asim Munir” “For comment: Nobody.” 

CDF मोहल्ला रिफॉर्म्स 2025: अब हर गली में जनरल का राज

मोर्चा नंबर 1 – गली की मीटिंग अब “वार रूम” कहलाएगी!

पहले पार्क में मोहल्ला मीटिंग होती थी, अब वही “डिफेंस कमांड रूम” बनेगा।

  • चाय पीने वालों की जगह “स्ट्रैटेजिक एनालिस्ट” बैठेंगे
  • जो सबसे ज़ोर से बोलेगा, वही बनेगा डेप्युटी कमांडर (सफाई विभाग)

CDF मुनीर मॉडल – मोहल्ले की सरकार अब एक ही बंदे के हाथ में

हर मोहल्ले में अब “जनरल मुनीर” टाइप एक शख्स होगा जो बोलेगा — “कचरा उठाना है या पड़ोसी को हटाना है, सब फैसला मैं ही करूंगा!”

मकान नंबर 420 का राजेश बोलेगा — “भाई, अब तो अपने घर की छत पर भी परमिशन लेनी पड़ती है!”

अब चुनाव नहीं, “ऑपरेशन वोट-स्टॉर्म” होगा!

पहले वार्षिक चुनाव होते थे, अब “सीक्रेट वोटिंग विद मिलिट्री कवर” होगी। जो जीता, वही जनरल — और जो हारा, उसे “विदेशी ताकतों का एजेंट” घोषित कर दिया जाएगा।

मोहल्ले का वॉचमैन = अब इंटेलिजेंस चीफ!

पहले वो सिर्फ आने-जाने वालों का हिसाब रखता था। अब वो कहेगा — “साहब, कल शर्मा जी की छत पर दो संदिग्ध कबूतर उतरे थे।” और रिपोर्ट सीधे मोहल्ला CDF को जाएगी।

हर घर में ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ के नाम पर 9 बजे का सन्नाटा!

अब मोहल्ले में 9 बजे के बाद कोई DJ Night या लूडो मैच नहीं होगा। क्योंकि सीडीएफ का आदेश साफ़ है — “राष्ट्र की नींद ज़रूरी है, बाकी सब बाद में।” 

गली का इन्वर्टर!

CDF मुनीर जैसे मोहल्ले के नेता बोलेगा — “लाइट गई तो बटन दबाऊंगा, पूरी गली जगमगा उठेगी या उड़ जाएगी — देखा जाएगा।” 

मोहल्ले की बाउंड्री वॉल तक सीमित!

अब बाहर के मोहल्लों से रिश्ते “सुरक्षा समझौते” के बाद ही होंगे। “भाई, वो यादव नगर वालों से क्रिकेट मैच नहीं खेलेंगे — पहले वो हमारे कुर्सी वाले पार्क का कब्ज़ा छोड़ें।” 

“जहां मोहल्ले में तर्क खत्म होता है, वहां से CDF शुरू होता है।” अब गली के हर मसले पर जनरल मुनीर टाइप नेता बोलेगा — “अब फैसला लोकतांत्रिक नहीं, रणनीतिक होगा।

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